मनुष्य ने जब से आधुनिक विकास की ओर तेज़ी से कदम बढ़ाए हैं, तब से पृथ्वी का प्राकृतिक संतुलन लगातार बदलता गया है। आज “ग्लोबल वार्मिंग” केवल एक वैज्ञानिक शब्द नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानव सभ्यता के सामने खड़ी एक गंभीर चुनौती बन चुका है। बढ़ता तापमान, पिघलते ग्लेशियर, असामान्य वर्षा, सूखा, जंगलों में आग और समुद्र के बढ़ते जलस्तर — ये सभी संकेत हैं कि प्रकृति कहीं न कहीं असंतुलित हो रही है। किन्तु इस गंभीर विषय के बीच एक ऐसी धारणा भी तेजी से फैल रही है कि गाय, भैंस और अन्य पशु ही ग्लोबल वार्मिंग के सबसे बड़े कारण हैं। सोशल मीडिया और अनेक चर्चाओं में यह बात बार-बार कही जाती है कि पशुओं द्वारा छोड़ी जाने वाली मीथेन गैस पृथ्वी को नष्ट कर रही है। कुछ लोग तो यहाँ तक कह देते हैं कि यदि पृथ्वी को बचाना है, तो पशुपालन समाप्त कर देना चाहिए। परन्तु क्या वास्तव में सत्य इतना सरल है? क्या केवल जानवर ही इस संकट के सबसे बड़े कारण हैं? या फिर वास्तविकता इससे कहीं अधिक व्यापक और जटिल है?
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में chips, cold drinks, instant noodles, packed snacks और sugary foods लोगों की daily lifestyle का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन health experts अब इन्हें “Silent Health Risk” बता रहे हैं। नई reports और studies के अनुसार लगातार ultra processed food खाने से मोटापा, diabetes, high BP और heart problems का खतरा तेजी से बढ़ सकता है।
देश के कई हिस्सों में इस समय गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में तापमान 45°C के करीब पहुंच गया है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में Heatwave और तेज होने की संभावना जताई है। Doctors ने भी लोगों को दोपहर में बाहर निकलने से बचने और ज्यादा पानी पीने की सलाह दी है।
भारत में युवा वर्ग तेजी से obesity, diabetes और fatty liver जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहा है।