मनुष्य ने जब से आधुनिक विकास की ओर तेज़ी से कदम बढ़ाए हैं, तब से पृथ्वी का प्राकृतिक संतुलन लगातार बदलता गया है। आज “ग्लोबल वार्मिंग” केवल एक वैज्ञानिक शब्द नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानव सभ्यता के सामने खड़ी एक गंभीर चुनौती बन चुका है। बढ़ता तापमान, पिघलते ग्लेशियर, असामान्य वर्षा, सूखा, जंगलों में आग और समुद्र के बढ़ते जलस्तर — ये सभी संकेत हैं कि प्रकृति कहीं न कहीं असंतुलित हो रही है। किन्तु इस गंभीर विषय के बीच एक ऐसी धारणा भी तेजी से फैल रही है कि गाय, भैंस और अन्य पशु ही ग्लोबल वार्मिंग के सबसे बड़े कारण हैं। सोशल मीडिया और अनेक चर्चाओं में यह बात बार-बार कही जाती है कि पशुओं द्वारा छोड़ी जाने वाली मीथेन गैस पृथ्वी को नष्ट कर रही है। कुछ लोग तो यहाँ तक कह देते हैं कि यदि पृथ्वी को बचाना है, तो पशुपालन समाप्त कर देना चाहिए। परन्तु क्या वास्तव में सत्य इतना सरल है? क्या केवल जानवर ही इस संकट के सबसे बड़े कारण हैं? या फिर वास्तविकता इससे कहीं अधिक व्यापक और जटिल है?